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Tag: बहुजन साहित्य

भारत का बहुजन आख़िर कब बोलेगा ? (गीत)

Surya Bali

डॉ सूर्या बाली ‘सूरज धुर्वे’ (Dr. Surya Bali ‘Suraj Dhurve)   गहरी निद्रा से आँखे कब खोलेगा? भारत का बहुजन आख़िर कब बोलेगा ?   कब बोलेगा इन झूठी सरकारों पर ? कब  बोलेगा बिके हुए अख़बारों पर ? कब तक ओछी राजनीति को झेलेगा ? कब बोलेगा धरम के अत्याचारों पर ? बंद ज़ुबानो […]

हरिजन नहीं हरिद्रोही बनो (कविता)

Suraj k Bauddh

सूरज कुमार बौद्ध (Suraj Kumar Bauddh)     अब संतोष नहीं संताप करो नवीन इतिहास का परिमाप गढ़ो अपने हक हुक़ूक़ हेतु आरोही बनो  विद्रोही बनो! विद्रोही बनो!   गुलामी के अस्तबल से बाहर निकल  अटल अडिग अश्वरोही बनो विद्रोही बनो! विद्रोही बनो!   वे सर्वोच्चता की ललक में रक्तपिपासु हो गए हैं एक एक […]

टोपीवाला नंबर ‘2’ – अन्ना हज़ारे

gurinder azad

एक नन्हीं कहानी – थोड़ी कविता की रंगत में    वो अचानक से प्रकट हुआ कहने लगा इस देश का पेट ख़राब है भ्रष्टाचार के कीड़े हैं इसमें खोखला हो रहा है ये मेरे पास दवा है मेरे साथ आओ देश भक्त बनो देश भक्ति दिखाओ           सभी ने उसकी बात […]

‘बहुजन साहित्य’ की अवधारणा के औचित्य की एक पड़ताल

डॉ मुसाफ़िर बैठा ओबीसी साहित्य और बहुजन साहित्य की धारणा को हिंदी साहित्य के धरातल पर जमाने का प्रयास बिहार के कुछ लोग और उनका मंच बनी ‘फॉरवर्ड प्रेस’ पत्रिका पिछले तीन-चार वर्षों से (अब सिर्फ ऑनलाइन) करती रही है। दरअसल, यह हिंदी में दलित साहित्य की सफलता एवं स्वीकृति से प्रभावित होकर पिछड़ी जातियों […]