Posted on: July 1, 2020 Posted by: Gurinder Comments: 2

सफाई कर्मचारीयों के मुद्दे क्या अदृश्य हैं जो व्यवस्था को नज़र नहीं आते?

क्रांति खोड़े (Kranti Khode) आज हमारे देश के साथ-साथ कई अन्य देश भी कोरोना वायरस कोविड 19 वैष्विक महामारी से जुझ रहे हैं. इस महामारी की शुरुआत चीन के वुहान शहर से हुई. 31 दिसंबर को वुहान में प्रथम कोरोना वायरस पॉजिटिव मामला दर्ज हुआ. WHO ने इस बिमारी को महामारी घोषित किया. चीन के बाद इस महामारी ने इटली, अमेरिका व युरोप के कई देशों को अपनी चपेट में…

Posted on: June 30, 2020 Posted by: administrator Comments: 0

‘ना तो मैं तुम्हारा आंकड़ा हूँ, ना ही कोई वोट बैंक हूँ’: सामाजिक कार्यकर्ता और समाजशास्त्री अभय खाखा की याद में

View Post चित्रांगदा चौधुरी (Chitrangada Choudhury), अनिकेत आगा (Aniket Aga) बात 18 मार्च 2015 की है. झारखंड के लातेहर जिले के बरवाडीह प्रखंड-कार्यालय के नजदीक लगभग 60 आदिवासी पुरुषों ने 2013 के ‘भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार, पुनर्वास, पुनर्स्थापन अधिनियम’ में संशोधन के उद्देश्य से लाये गये मोदी सरकार के विधेयक की प्रतियों पर खुले में शौच कर विरोध जताया. एक लंबी लड़ाई चली थी कि…

Surya Bali
Posted on: June 28, 2020 Posted by: administrator Comments: 3

गढ़ा मंडला की महारानी दुर्गावती का बलिदान और ब्राह्मणवादी षणयंत्र

डॉ. सूर्या बाली “सूरज धुर्वे” रानी दुर्गावती ने भारतीय, खासकर गोंडवाना के लोगों के दिलों में बहुत सम्मानपूर्ण स्थान प्राप्त किया है. आज भी लोग उनकी वीरता और बलिदान की कहानियाँ सुनाते हुए रोमांचित हो उठते हैं और ऐसी अद्वितीय वीरांगना के वंशज होने पर गर्व करते हैं. आज भी उनके लिए करोड़ों कोइतूरों के दिलों में अपार श्रद्धा है जो उनकी याद को अपने अंदर सँजोये हुए हैं. मेरे…

Posted on: June 20, 2020 Posted by: administrator Comments: 0

आप इसे भी पितृसत्ता कैसे कह सकते हैं…?

जूपाका सुभद्रा (Joopaka Subadra) जूपाका सुभद्रा की बातचीत का यह दूसरा भाग है जो उन्होंने भारत नास्तिका समाजम और साइंटिफिक स्टूडेंट्स फेडरेशन द्वारा आयोजित एक बातचीत में रखा था.                                            — सवर्ण महिलाओं का कहना है कि वे अपने घरों में अपने बच्चों की गंदगी साफ करती हैं. फिर इन…

Posted on: June 16, 2020 Posted by: administrator Comments: 4

ऑनलाईन शिक्षण-प्रणालीः वर्तमान चुनौतियाँ और ग्रामीण एवं दलित छात्रों का हाशियाकरण

दीपक कुमार (Deepak Kumar), ज्योति दिवाकर (Jyoti Diwakar) वर्तमान में भारत समेत, विश्व के 195 देश कोविड– 19 (कोरोना वायरस) से प्रभावित है. इस महामारी में लोग सामाजिक, राजनीतिक तथा आर्थिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं. इसके साथ ही भारत की शिक्षा-व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है. इस महामारी वजह से सरकार नई शिक्षा नीति– 2019 के तहत ऑनलाईन शिक्षा-व्यवस्था को लागू करना चाहती है. लेकिन इस व्यवस्था से…

Posted on: June 13, 2020 Posted by: administrator Comments: 0

पितृसत्ता, नारीवाद और बहुजन महिलाएं

जूपाका सुभद्रा (Joopaka Subadra)   जूपाका सुभद्रा से बातचीत का यह (पहला) भाग भारत नास्तिका समाजम और साइंटिफिक स्टूडेंट्स फेडरेशन द्वारा आयोजित एक बातचीत में उन्होंने रखा था.   आज मैं जिस विषय पर बात करने जा रही हूँ, वह है ‘पितृसत्ता, नारीवाद और बहुजन महिलाएँ’! नारीवादियों के अनुसार, नारीवाद, महिलाओं और पुरुषों के बीच, समानता को लेकर है, और, समानता के लिए है. वे कहती हैं, सभी महिलाएं समान हैं, और यह कि हमारे बीच कोई मतभेद नहीं हैं, हमारे…

Posted on: June 12, 2020 Posted by: Gurinder Comments: 0

पाताल लोक, और स्वर्ग लोक में पसरी सड़ाँध (समीक्षा)

इस्तिखार अली (Istikhar Ali) हाल ही में, अमेज़न प्राइम पर पाताल लोक, एक वेब सिरीज़ रिलीज हुआ जो तुरंत चर्चा में आ गया. इसकी तुलना दर्शक ‘सेक्रेड गेम्स’ से भी कर रहे है। पाताल लोक दर्शकों पर अलग छाप छोड़ रहा है। मुख्यतः इसने हिन्दी भाषा बोलने-समझने वाले समाज में बहुत से लोगों का ध्यान अपनी और खींचा है. जिस कंटेंट का बनना और फिर सिल्वर स्क्रीन या टेलीविज़न पर…

Surya Bali
Posted on: June 11, 2020 Posted by: administrator Comments: 9

क्यूँकि मैं आदिवासी हूँ!

डॉ सूर्या बाली “सूरज धुर्वे” (Dr. Surya Bali “Suraj Dhurve”) “हे सन वेक अप“ कानों में डैडी की आवाज़ गूंजी मुँह से अपने आप निकला- गुड मार्निंग डैड, गुड मार्निंग मॉम! यही है मेरा सनातनी सेवा जोहार क्यूँकि मैं आदिवासी हूँ! आज संडे है सुबह से ही घर में हलचल है सब लोग जल्दी में हैं, तैयार हो रहे हैं क्यूँकि जाना है चर्च और करना है संडे की प्रेयर…

Akash Kumar Rawat
Posted on: June 10, 2020 Posted by: administrator Comments: 1

अंतर्द्वंद से जूझती उत्तर भारत की समाजवादी राजनीति

आकाश कुमार रावत (Akash Kumar Rawat) एक विचार अथवा वैचारिक राजनीति तब ज्यादा कमज़ोर हो जाती है, जब उस विचार को जन्म देने वाले और पोषित करने वाली शक्तियाँ ही उस पर अपना विश्वास छोड़ देती हैं. दूसरे शब्दों में कहें तो किसी भी व्यक्ति को अपने विचार का प्रचार प्रसार करने और दूसरों से भी यह उम्मीद करना कि वह भी वैसा ही करे, उसके लिए सर्वप्रथम उस व्यक्ति…

khalid anis ansari
Posted on: June 9, 2020 Posted by: administrator Comments: 2

क्या पसमांदा शब्द पर पुनः विचार करने की ज़रुरत है?

खालिद अनीस अंसारी (Khalid Anis Ansari) इधर कुछ दिनों से एक व्हाट्सएप ग्रुप में पसमांदा शब्द पर चल रही भीषण बहसों को देख रहा था. ग्रुप में कुछ लोगों की राय थी कि पसमांदा शब्द पर दोबारा सोचने की ज़रुरत है क्योंकि यह पिछड़ेपन को दर्शाता है और ऐसी मानसिकता के साथ विकास संभव नहीं है. मैं अपने सीमित अनुभव के आधार पर यह कह सकता हूँ कि इस तरह…