Ghoul वेबसीरीज | राज्य का आतंकवाद व् पसमांदा दृष्टिकोण | समीक्षा

लेनिन मौदूदी (Lenin Maududi) अरबी दास्तानो में एक राक्षस या फिर जिन्न् के बारे में ज़िक्र है जो इंसानो की रूह के बदले उनका कोई काम कर देता है. इस राक्षस का नाम गूअल “Ghoul” हैं. इसी राक्षस (Ghoul) के नाम पर नेटफ्लिक्स (Netfilix) ने एक डरावनी मिनीसीरीज़ (horror miniseries) बनाई है जो मात्र 3 […]

झुंडः सरोकार का कलात्मक सौंदर्यबोध और समाज मनोविज्ञान की संवेदना

परतों के पार से फूटते सवाल के साथ झुंड ने नजरिये की नई कसौटी सामने रखी है, जिसके पैमाने पर परंपरावादी विचार-सत्ता को शायद अपने आग्रहों के भीतर झांकने का मौका मिले। अरविंद शेष (Arvind Shesh) शेर अगर भेड़िए से डरता है तो इसकी वजह है! भेड़िए की असली ताकत उसके दांत नहीं होती है, […]

शैक्षणिक संस्थानों में प्रशासनिक अकर्मण्यता: प्रावधान और अनुपालन

राघवेंद्र यादव (Raghavendra Yadav) जैसा कि यह सर्वविदित है कि अतीत में हुए सामाजिक अन्याय व भेदभाव से उपजे गैर बराबरी को मिटाने के लिए संविधान प्रदत्त अधिकार सही तरह से जमीनी स्तर पर इम्प्लीमेंट (अमल) नहीं हो पायें हैं। आज आज़ाद भारत आठवें दशक के पूर्वार्द्ध में है लेकिन हैरत की बात है कि […]

झुंड- मानव अस्तित्व की लड़ाई

जे. एस. विनय (J. S. Vinay) नागराज मंजुले वापस आ गए हैं और इस बार वह हमें अपनी पहली हिंदी फिल्म झुंड (जो 4 मार्च, 2022 को रिलीज़ हुई थी) के माध्यम से साहस की अज्ञात कहानियाँ बता रहे हैं। नागराज लोगों को सबसे संवेदनशील तरीके से चित्रित करने के लिए जाने जाते हैं और […]

बाबा साहेब का माता रमाबाई के नाम पत्र और प्रेम के गहरे मायने

दीपशिखा इंन्द्रा (Deepshikha Indra) एक रोज़ मैंने एक छोटा सा लेख (प्रेम के सही मायने) प्रेम के विषय पर लिखा था. प्रेम/प्यार को सभी अपने हिसाब और अनुभव से बयाँ करते हैं. मैंने भी इसे समझने का प्रयास किया. प्रेम की आवश्यकता तो हर जगह ही है लेकिन सामाजिक रिश्तों खासतौर पर वैवाहिक जीवन में इसका […]

आक्रामकता, हिंदुत्व और ‘मोदी लहर’ का सच बनाम अखिलेश यादव की राजनीति

Devi Prasad HCU

देवी प्रसाद (Devi Prasad) भाजपा की स्थापना 6 अप्रैल 1980 में हुई थी. यह वही दौर था, जब मंडल कमीशन ने 27 प्रतिशत आरक्षण पिछड़े वर्ग यानि देश की लगभग आधी आबादी को सामाजिक न्याय देने का सुझाव दिया था. हालांकि, ‘सॉफ्ट’ हिंदुत्वा’ की राह पर चलने वाली कांग्रेस ने कमंडल के डर से एक […]

रिक एंड मोर्टी: सृष्टि, विज्ञान और इंसान (वेबसीरिज़ समीक्षा)

लेनिन मौदूदी (Lenin Maududi) रिक एंड मोर्टी (Rick and Morty) एक अमेरिकी सिटकॉम (sitcom) है जिस को जस्टिन रोइलैंड (Justin Roiland) और डेन हारमॉन (Dan Harmon) ने बनाया है। 2013 से अब तक इसके पाँच दौर यानि सीज़नस (seasons) आ चुके हैं। पहली नज़र में यह सीरीज़ आप को बच्चों का कोई आम सा कार्टून […]

डोन्ट लुक अप’: धारणा निर्माण का एक और खेला

अरविंद शेष (Arvind Shesh) ‘डोन्ट लुक अप’ भी सुर्खियों में है। जो दौर चल रहा है, उसमें जो भी चीज सुर्खियों में हो, उस पर एक बार तो शक कर ही लेना चाहिए! दिमाग के ‘डिटॉक्सिफिकेशन’ (अंग्रेजी का एक शब्द जिसका अर्थ है गलत खानपान की वजह से शरीर में बन गए ज़हरीले तत्वों को […]

सावित्री बाई फुले को उनके 191वें जन्मदिन पर याद करते हुए

डॉ सूर्या बाली “सूरज धुर्वे” (Dr. Suraj Bali ‘Suraj Dhurvey’) शिक्षा के महत्त्व को सावित्री बाई फुले ने जितनी व्यापकता से समझा उसकी मिसाल उनके पूरे जीवन में उनके द्वारा किये बाकमाल कार्यों से मिलती है. शिक्षा के ऐसे महत्त्व में उनके अपने निजी जीवन शिक्षा के चलते आये ज़बरदस्त परिवर्तन की छाप भी है. […]

द पियानिस्ट : जब कानून का पालन ही मानव त्रासदी का कारण बन जाए

लेनिन मौदूदी (Lenin Maududi) द पियानिस्ट (The Pianist, 2004) रोमन पोलांस्की की होलोकॉस्ट (यहूदियों का जनसंहार) पर बनाई गई सर्वश्रेष्ठ फ़िल्मों में से एक है. यह फिल्म पोलिश पियानिस्ट व्लादिस्लाव स्पिलमैन (Wladyslaw Szpilman) की सच्ची घटना पर आधारित है. निर्देशक रोमन पोलांस्की ख़ुद एक होलोकॉस्ट सर्वाइवल थे, जिस का प्रभाव फ़िल्म की बारीकियों में नज़र आती है.  […]