मुझे प्यार करती, ऐ पर-जात लड़की…

(1) गैर विद्रोही कविता की तलाश मुझे गैर विद्रोहीकविता की तलाश हैताकि मुझे कोई दोस्तमिल सके।मैं अपनी सोच के नाखूनकाटना चाहता हूँताकि मुझे कोईदोस्त मिल सके।मैं और वहसदा के लिए घुलमिल जायें।पर कोई विषयगैर विद्रोही नहीं मिलताताकि मुझे कोई दोस्त मिल सके। (2) ये रास्तेधरती और मंगल के नहींजिन्हें राकेट नाप सकते हैंना ये रास्ते […]

जाति कहाँ नहीं? – एक स्त्री का परिपेक्ष्य

डॉ अमृतपाल कौर (Dr. Amritpal Kaur) परख हो यदि नज़र मेंतो कहाँ नहीं अस्त्तित्व जाति का स्त्री के पूर्ण समर्पण में,पुरुष की मर्दानगी के अंहकार में स्त्री की यौनि मेंपुरुष के लिंग में कन्या की योनिच्छद की पहरेदारी मेंकन्या के दान में बेटी पैदा होने के गम मेंबेटा पैदा होने की खुशी में लज्जित की […]

जातियों के झुण्ड; हिन्दू सभ्यता की ऊँची इमारत; दो कविताएँ

जातियों के झुण्ड निकल चुके हैंजातियों के झुण्डअपनी पीठ पर उठायेवर्णाश्रम का बोझजो उठाये जा रहे सदियों से बोझ जो सदियों से थोपे गयेब्राह्मणों के द्वाराखेत की पगडंडियों से लेकरगांव की गलियों तकसड़कों से लेकर हाईवे के सन्नाटों तकये चले जा रहे। इन जातियों के झुंडों ने बनाई है इमारतेंउगाई हैं फसलें, भरे हैं पेट […]

क्या ब्राह्मण हिट-एंड-रन करते हैं?!

कुफिर (Kuffir) क्या ब्राह्मण अपनी गाड़ी से किसी को उड़ा कर वहाँ से भाग जाते हैं? मतलब: क्या ब्राह्मण मोटर दुर्घटना का कारण बनते हैं और भाग जाते हैं? हालिया की दो घटनाएं कहती हैं कि वे ऐसा करते हैं। पहली घटना एक फिल्म की है, जो कि एक कल्पना की दुनिया वाला काम है; […]

लिंगायत समुदाय की मांगें बनाम हिन्दू धर्म

विनय डी दामोदर (Vinay D Damodar) परिचय पूरे भारत में, जातीय कारक दलगत राजनीतिक कार्यों को अच्छा ख़ासा प्रभावित करते हैं। यहाँ तक कि वामपंथी दल (केरल गवाह है) भी मौजूदा सामाजिक-राजनीतिक माहौल से नहीं बच पाए हैं। कर्नाटक में, कई अन्य राज्यों की तरह, राजनीतिक सत्ता के लिए संघर्ष इसी तर्ज पर विकसित हुआ […]

झुंडः सरोकार का कलात्मक सौंदर्यबोध और समाज मनोविज्ञान की संवेदना

परतों के पार से फूटते सवाल के साथ झुंड ने नजरिये की नई कसौटी सामने रखी है, जिसके पैमाने पर परंपरावादी विचार-सत्ता को शायद अपने आग्रहों के भीतर झांकने का मौका मिले। अरविंद शेष (Arvind Shesh) शेर अगर भेड़िए से डरता है तो इसकी वजह है! भेड़िए की असली ताकत उसके दांत नहीं होती है, […]

बाबा साहेब का माता रमाबाई के नाम पत्र और प्रेम के गहरे मायने

दीपशिखा इंन्द्रा (Deepshikha Indra) एक रोज़ मैंने एक छोटा सा लेख (प्रेम के सही मायने) प्रेम के विषय पर लिखा था. प्रेम/प्यार को सभी अपने हिसाब और अनुभव से बयाँ करते हैं. मैंने भी इसे समझने का प्रयास किया. प्रेम की आवश्यकता तो हर जगह ही है लेकिन सामाजिक रिश्तों खासतौर पर वैवाहिक जीवन में इसका […]

आक्रामकता, हिंदुत्व और ‘मोदी लहर’ का सच बनाम अखिलेश यादव की राजनीति

Devi Prasad HCU

देवी प्रसाद (Devi Prasad) भाजपा की स्थापना 6 अप्रैल 1980 में हुई थी. यह वही दौर था, जब मंडल कमीशन ने 27 प्रतिशत आरक्षण पिछड़े वर्ग यानि देश की लगभग आधी आबादी को सामाजिक न्याय देने का सुझाव दिया था. हालांकि, ‘सॉफ्ट’ हिंदुत्वा’ की राह पर चलने वाली कांग्रेस ने कमंडल के डर से एक […]

डोन्ट लुक अप’: धारणा निर्माण का एक और खेला

अरविंद शेष (Arvind Shesh) ‘डोन्ट लुक अप’ भी सुर्खियों में है। जो दौर चल रहा है, उसमें जो भी चीज सुर्खियों में हो, उस पर एक बार तो शक कर ही लेना चाहिए! दिमाग के ‘डिटॉक्सिफिकेशन’ (अंग्रेजी का एक शब्द जिसका अर्थ है गलत खानपान की वजह से शरीर में बन गए ज़हरीले तत्वों को […]

सावित्री बाई फुले को उनके 191वें जन्मदिन पर याद करते हुए

डॉ सूर्या बाली “सूरज धुर्वे” (Dr. Suraj Bali ‘Suraj Dhurvey’) शिक्षा के महत्त्व को सावित्री बाई फुले ने जितनी व्यापकता से समझा उसकी मिसाल उनके पूरे जीवन में उनके द्वारा किये बाकमाल कार्यों से मिलती है. शिक्षा के ऐसे महत्त्व में उनके अपने निजी जीवन शिक्षा के चलते आये ज़बरदस्त परिवर्तन की छाप भी है. […]