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Tag: Bahujan Perspective

हाथरसः तोड़नी होगी अन्याय की असली ज़मीन

बी. शारदा (B. Sharda) अन्याय के प्रतिकार के लिए शायद ‘अन्याय’ ही रास्ता है, तभी एक न्याय व्यवस्था उभर कर आएगी। अन्याय क्या है, यह कौन बताएगा? अन्याय की समझ सबके भीतर अपने जीवन के कटु अनुभवों से आती है। खासतौर पर तब जब व्यक्ति उस बात की सजा पाता है जो अपराध उसने किया […]

टीना डाबी के दफ्तर-प्रवेश का ब्राह्मणी कर्मकांड बनाम वैज्ञानिक चेतना की कसौटी

अरविंद शेष (Arvind Shesh) बेशक इसरो के चीफ वैज्ञानिक माधवन नायर या वैज्ञानिक राधाकृष्णन या वैज्ञानिक के. शिवन के मुकाबले आइएएस टीना डाबी की जिम्मेदारी ज्यादा है अंधविश्वासों के खिलाफ वैज्ञानिक चेतना को निबाहने की, उसे मजबूत करने की! इसरो के वैज्ञानिक माधवन नायर या राधाकृष्णन अगर किसी भी अंतरिक्ष यान के प्रक्षेपण के पहले […]

यहाँ एक तस्वीर है

[smartslider3 slider=2] अनु रामदास (Anu Ramdas) कुछ समय पहले की बात है जब मैं एक शूद्र संत-कवि सरलादास द्वारा लिखित उड़िया महाभारत के अनुवाद की तलाश कर रही थी. द शेयर्ड मिरर  पर सरला की गंगा पर केंद्रित एक अंश को पोस्ट करने के लिए उत्सुक थी. इसलिए मैं पुस्तकालय और इंटरनेट पर इन पर […]

एंटी-कास्ट पॉलिटिक्स को समझने में उदारवादियों के भीतर दर्शन की कंगाली

ओमप्रकाश महतो (Omprakash Mahato) ऐसे सामाजिक वैज्ञानिक भी हैं जो केवल कागज़ों-किताबों के माध्यम से या सम्मेलनों और सेमिनारों में भाग लेकर या समाज का दूर से अवलोकन आदि करके ही जाति पर अपने विचार विकसित करते हैं. जबकि पाठ्यपुस्तकों को पढ़ना एक पारंपरिक तरीका है, कुछ विद्वान बॉलीवुड फिल्में देखने, समाचार पत्र पढ़ने, न्यूज़-रूम […]

आप इसे भी पितृसत्ता कैसे कह सकते हैं…?

जूपाका सुभद्रा (Joopaka Subadra) जूपाका सुभद्रा की बातचीत का यह दूसरा भाग है जो उन्होंने भारत नास्तिका समाजम और साइंटिफिक स्टूडेंट्स फेडरेशन द्वारा आयोजित एक बातचीत में रखा था.                                            — सवर्ण महिलाओं का कहना […]

ऑनलाईन शिक्षण-प्रणालीः वर्तमान चुनौतियाँ और ग्रामीण एवं दलित छात्रों का हाशियाकरण

दीपक कुमार (Deepak Kumar), ज्योति दिवाकर (Jyoti Diwakar) वर्तमान में भारत समेत, विश्व के 195 देश कोविड– 19 (कोरोना वायरस) से प्रभावित है. इस महामारी में लोग सामाजिक, राजनीतिक तथा आर्थिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं. इसके साथ ही भारत की शिक्षा-व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है. इस महामारी वजह से सरकार नई शिक्षा […]

पितृसत्ता, नारीवाद और बहुजन महिलाएं

जूपाका सुभद्रा (Joopaka Subadra)   जूपाका सुभद्रा से बातचीत का यह (पहला) भाग भारत नास्तिका समाजम और साइंटिफिक स्टूडेंट्स फेडरेशन द्वारा आयोजित एक बातचीत में उन्होंने रखा था.   आज मैं जिस विषय पर बात करने जा रही हूँ, वह है ‘पितृसत्ता, नारीवाद और बहुजन महिलाएँ’! नारीवादियों के अनुसार, नारीवाद, महिलाओं और पुरुषों के बीच, समानता को लेकर है, और, समानता के लिए […]

कोरोनाकाल चिन्तन: मीडिया सरकार पर मेहरबान या सरकार मीडिया पर

Islam Hussain

इस्लाम हुसैन (Islam Hussain) एक कविता है- राजा बोला रात है रानी बोली रात है मंत्री बोला रात है संतरी बोला रात है सब बोले रात है यह सुबह सुबह की बात है… गोरख पाण्डे की इस मशहूर कविता में अगर राजा के बाद रानी, मंत्री और संतरी आदि को ए, बी, सी, डी मीडिया […]

सुपर हीरो की दुनिया में नस्लवाद: ‘वॉचमेन’ की समीक्षा

Lenin Maududi

लेनिन मौदूदी (Lenin Maududi) 31 मई 1921 की बात है, जिला ग्रीनवुड (Greenwood district) के ओक्लाहोमा (Oklahoma) में स्थित टुल्सा (Tulsa) के एक सिनेमाघर में एक बच्चा फ़िल्म देख रहा है. फ़िल्म का नायक एक नकाबपोश काला हीरो है. जो गोरों की जान बचाता है, सभी उससे प्यार करते हैं. बच्चा उस हीरो को देख […]

भारतीय संस्कृति किसकी है, बहुजनों की या ब्राह्मण धर्म की?

Amit Kumar Mumbai

अमित कुमार (Amit Kumar) हिन्दू कोई धर्म नहीं है, कथित ज्ञाता सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कहा, इस पर कोई बवंडर नहीं मचा. हिन्दू कोई धर्म नहीं है, 1995 के प्रसिद्ध हिंदुत्ववाद में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा इस पर भी कोई हंगामा नहीं हुआ. हिन्दू कोई धर्म नहीं बल्कि एक संस्कृति है, वीर सावरकर ने कहा, तब […]