बाल गंगाधर बाग़ी (Bal Gangadhar Baghi)

1.

किसान

किसान नहीं तो भोजन नहीं,
भोजन नहीं तो जीवन नहीं।
और जीवन नहीं तो मानवता सभ्यता का अंत।
फिर किसी का भी इतिहास नहीं होगा
क्योंकि इतिहास लिखने के लिए
इतिहासकार का भी ज़िंदा रहना ज़रूरी है
यही ज़िंदगी की धूरी है।
इसीलिए !
किसान का अंत होना,
इतिहास का भी अंत होना है !

2.

रोटी का इतिहास

दुनिया में कितने फैशन आये और चले गये
पर रोटी का फैशन नहीं बदला
मगर रोटी आज भी रोटी है
धन, धर्म, नस्ल, वर्ग जाति, लिंग संघर्ष में
कितने लोग मर गये
पर रोटी नहीं मरी
वो आज भी ज़िंदा है !
सबको ज़िंदा रखने के लिए
तवे पर जलकर भी
दांतों तले पिसकर भी।

लेकिन
रोटी को भी ज़िंदा रखने के लिए
कोई जल, मिट्टी, प्रकाश के पर्यावरणीय सन्तुलन से लाखों वर्षों से लड़ रहा है।
उस अदम्य साहस का नाम किसान है।


3.

अनाज का रसायन विज्ञान

दुनिया में माँ की ममता का मोल कोई नहीं
और रोटी जैसा दूसरा कोई गोल नहीं
और इससे बड़ा कोई भूगोल नहीं।

क्योंकि
यह मां के पेट में जाकर दूध बनकर
बच्चों के हलक में उतर कर
ऊर्जा का संचार करता है
पर लोग समझते हैं कि
रोटी खाई जाती है
पी नहीं जाती।

जो दूध पीता है वह किसी का खून पीता है
और यह खून अनाज का दूसरा नाम है
जिसे किसान पैदा करता है।
किसान आपकी माँ की भी माँ
और पिता का भी पिता है।
पर कुछ लोग समझते हैं कि
उनके पिता का नाम ज़मीनदार सिंह
और माता का नाम भूमिका है।

अनाज रसायन विज्ञान है
और किसान रसायन विज्ञानी
यही दुनिया का अमृत है
जिसके बिना सब मृत है!
क्या राजा!
क्या प्रजा!


4.

बुद्ध की कृषि

वे कृषि संसाधन को ख़त्म करने के लिए
पशु संसाधन की हत्या किये
और लोग विरोध न करें
इसीलिए !
इसे धार्मिक कर्मकांड बताया
जिसका नाम पशु बलि यज्ञ दिया।

कृषि जीवन का आधार है
यही बुद्ध का सार है
जिसकी रक्षा के लिए
किसानों को “अत्त दीपो भव” का मार्ग दिये
और स्वंय रक्षा के लिए
संसाधनों की रक्षा पर ज़ोर दिये।
क्योंकि वह जानते थे कि !
अल्पजन, अल्प संसाधन पर ज़िंदा रह जायेंगे
मगर बहुजन !
संसाधनों के अभाव में
अपना जन-गण-मन खोकर,
इतिहास से नष्ट हो जायेंगे…


5

किसान की सभ्यता

किसान मानव सभ्यता की सौर ऊर्जा है
जिसने खेती के पन्ने पर
हल की कलम से
प्रकृति का इतिहास लिखा है।
हड़प्पा, मेसोपोटामिया, ग्रीक, रोम, मिश्र
आदि को अनन्त लिखा है।
और आज भी गतिमान है
सौर मंडल के सूर्य की तरह।

किसान एक वैज्ञानिक है
खेती जिसकी प्रयोगशाला है
और उत्पादन जिसका आविष्कार है
यही दुनिया का आधार है
यह आधार जिस दिन ख़त्म होगा
पूरा विश्व निराधार हो होगा
बिना जंग के संहार होगा।
फिर किसी अवतार का तार
इसे नहीं जोड़ पायेगा।
क्यों कि जो अवतार लेते हैं
वह भी बिना भोजन के मर जाते हैं।

भूगोल विज्ञान की मां है
किसान भूगोल व विज्ञान के मध्य
बुद्ध के मध्यम मार्ग दर्शन की
की तरह अडिग खड़ा है।
जो अटल है, सत्य है, नित्य है।

इतिहास गवाह है किसान का विज्ञान
मानव जीवन को सरल बनाया
लेकिन उसका श्रेय
धर्म के कलम कसाई
अपने नाम लिख दिए
इसीलिए किसान अब
अपनी नस्लों के हाथों में
कागज़-कलम-किताब दे रहे हैं.

~~~

 

बाल गंगाधर ‘बाग़ी’ एक बहुजन कवि हैं. वे जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय से पी.एच.डी किये हैं. उनसे balganga3@gmail.com पर सम्पर्क किया जा सकता है.

One thought on “अनाज का रसायन विज्ञान (किसान को समर्पित 5 लघु कविताएँ)”

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