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मैंने पसमांदा कार्यकर्ता बनने का फैसला क्यों किया

रज़ाउल हक़ अंसारी (Razaul Haq Ansari)

शुरुआत करने के लिए, मैं अपने बारे में कुछ कहना चाहता हूँ. मैं झारखंड के देवघर से रज़ाउल हक़ अंसारी हूँ जो कि एक जुलाहा (बुनकर) जाति के एक मध्यम वर्गीय परिवार में पैदा हुआ. मैंने ग्रेटर नोएडा (एनसीआर) के एक निजी विश्वविद्यालय से प्रौद्योगिकी स्नातक (Bachelor of Technology) की पढ़ाई पूरी की है. मैं कुछ घटनाओं को साझा करना चाहता हूं जिसके माध्यम से मैं पहली बार मुसलमानों में जाति के प्रति जागरूक हुआ.

पहली घटना तब की है जब मैं पटना के एक सरकारी कॉलेज से इंटर की पढ़ाई कर रहा था. मैं बीस से अधिक अन्य छात्रों के साथ एक छोटे से लॉज में रह रहा था, और मेरा रूममेट भी मेरे ही शहर से था और वह भी एक जुलाहा था. इन बीस छात्रों में से सात नीची समझी जाने वाली जाति के मुसलमान थे और बाकी अशराफ़ यानि उच्च समझी जाने वाली जाति के मुसलमान थे. एक दिन सिद्दीकी शेख नाम का एक अशराफ़ मेरे दोस्त हुसैन, जो एक जुलाहा है, के साथ किसी विषय पर बहस कर रहा था. अचानक मेरे कमरे के सामने वे आपस में लड़ने लगे और सिद्दीकी ने हुसैन को लात मारी. उनकी लड़ाई की आवाज़ सुनाई दी तो हम अपने कमरों से बाहर निकले और उन्हें शांत किया. जब हुसैन अपने कमरे में लौट रहा था, तो सिद्दीकी ने उसे गाली देते हुए कहा कि “तुम जुलाहा हो, तुम्हारा कोई रुतबा नहीं है. मेरे साथ फिर से लड़ने की कोशिश मत करना, मैं तुम्हें बेरहमी से पीटूँगा”.

दूसरी घटना उस समय की है जब मैं ग्रेटर नोएडा में बी.टेक कर रहा था, और वहां मेरे तीन दोस्त थे: एक अशराफ़, एक भूमिहार और एक राजपूत. एक दिन तीनों ने मेरी जाति पूछी तो मैंने उनसे कहा कि मैं एक शेख मुसलमान हूँ. मेरे कॉलेज के आईडी कार्ड या सर्टिफिकेट में अंसारी नाम का कोई जिक्र नहीं है. उस दिन से भूमिहार और राजपूत दोनों मुझे शेख कहने लगे लेकिन अशराफ़ दोस्त को विश्वास नहीं हुआ कि मैं शेख या ऊंची जाति का मुसलमान हूँ. एक दिन उस अशराफ़ दोस्त ने मुझसे कहा कि तुम नीची जाति के मुसलमान हो, और जब मैंने कहा कि मुसलमानों में कोई जाति नहीं होती, तो उसने कहा- जाति होती तो है लेकिन तुम नहीं देख सकते.

मैंने पहली बार अक्टूबर 2018 में सुनील जनार्दन यादव की एक फेसबुक पोस्ट में ‘पसमांदा’ शब्द सुना. पोस्ट में उल्लेख किया गया था कि मुसलमानों को तीन वर्गों में विभाजित किया गया है: अशराफ़ यानि उच्च जाति के मुसलमान, अज़लाफ़ यानि निचली जाति के मुसलमान और अरज़ाल यानि अछूत या दलित मुसलमान. मैं यह पढ़कर चौंक गया और कई पसमांदा कार्यकर्ताओं द्वारा राउंड टेबल इंडिया (Round Table India) पर कई लेख पढ़ने के बाद, मैं समझ गया कि इस्लाम में धर्म के रूप में कोई जाति नहीं है, लेकिन मुसलमानों में जातिवाद मौजूद है. उसके बाद, मैंने मुसलमानों के बीच जाति व्यवथा पर चार-पाँच किताबें पढ़ीं, जैसे कि अली अनवर अंसारी जी द्वारा लिखी पुस्तक ‘मसावात की जंग‘, प्रोफेसर मसूद आलम फलाही की एक उर्दू में लिखी किताब ‘हिंदुस्तान में जात-पात और मुसलमान‘, और प्रोफेसर खालिद अनीस अंसारी जो कि एक एक वरिष्ठ बुद्धिजीवी हैं, उनके लिखे कई लेख पढ़े.

झारखंड में मुस्लिम आबादी 50 लाख से अधिक है, जिसमें से 97 प्रतिशत से अधिक पसमांदा समुदाय के लोग हैं और 90 प्रतिशत से अधिक जुलाहा (बुनकर) जाति से हैं.

झारखंड में कभी कोई मुस्लिम या पसमांदा सांसद नहीं रहे, लेकिन इस बार चार मुस्लिम विधायक हैं. इनमें से दो विधायक, आलमगीर आलम और सरफराज अहमद, दोनों शेख यानि ऊंची जातियों से हैं. दो अन्य विधायक निचली कही जाने वाली जातियों से हैं- इरफान अंसारी और हुसैन अंसारी, दोनों मोमिन जुलाहा जाति से हैं. तो, 3% ऊंची जाति के मुसलमानों के पास दो विधायक हैं, जबकि 97% निचली जाति के मुसलमानों के पास भी केवल दो ही विधायक हैं. मुसलमानों में मंसूरी, कुरैशी, रईन आदि कई अन्य निचली जातियां हैं, जो अभी तक विधानसभा में नहीं पहुंची हैं; अभी तक इसमें केवल अंसारी ही सफल हुए हैं. हाल ही में मॉब-लिंचिंग में कई पसमांदा मुसलमान मारे गए हैं, जैसे रामगढ़ के अलीमुद्दीन अंसारी, जामताड़ा से मिन्हाज अंसारी, सरायकेला खरसावां से तबरेज अंसारी और हाल ही में बोकारो से मुबारक अंसारी.

पसमांदा आंदोलन को पढ़ने और समझने के बाद, मैंने अपने समुदाय के लिए पसमांदा कार्यकर्ता बनने का फैसला किया. मैं धर्म से मुसलमान हूँ लेकिन मेरा राजनीतिक, शैक्षिक, सामाजिक, आर्थिक दर्शन पसमांदा है. मेरा दृढ़ विश्वास है कि पसमांदा दर्शन के बिना हम अपनी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकते.


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रज़ाउल हक़ अंसारी एक पसमांदा कार्यकर्ता हैं और झारखंड से हैं. वह ट्विटर पर @PasmandaArmy के संस्थापक हैं और उनसे @RazaulHaqAnsari (ट्विटर) पर संपर्क किया जा सकता है.

अनुवादक : गुरिंदर आज़ाद 

यह लेख मूल रूप में अंग्रेज़ी भाषा में है जिसे www.roundtableindia.co.in पर यहाँ क्लिक करके पढ़ा जा सकता है.

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