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राजस्थान में दलित छात्राओं के उत्पीड़न का एक और मामला

सुरेश जोगेश

4 नन्ही सी पीड़ित बेटियां, 1 बेबस लेकिन प्रयासरत शिक्षिका, सहमे अभिभाभावक, अफसरों की आज्ञा तले दबी स्थानीय पुलिस और 5 महीने से आतंक मचाये रसूखदार अपराधी

राजस्थान में पुनः एक 13 वर्षीय मासूम दलित के साथ वही किये जाने की कोशिश हो रही है जो डेल्टा मेघवाल के साथ हुआ.

पाली (राजस्थान) की यह घटना 14 व 16 मार्च की है. दो बार लगातार 12-14 साल की 4 मासूम लड़कियों के साथ सरकारी स्कूल में शारीरिक छेड़छाड़, पैसे देकर सम्बन्ध बनाने की कोशिश, धमकाकर सम्बन्ध बनाने की कोशिश, और आखिर में सफल न होने पर धमकाकर चुप करवाने की निरंतर कोशिश जारी है । 

पाली (राजस्थान) के सोजत शहर में बने आवासीय कस्तूरबा गांधी विद्यालय में sc/st की तक़रीबन 100 बालिकाएं रहती हैं. सभी छोटी कक्षाओं की. 

8 वीं  कक्षा के लिए बोर्ड की परीक्षा के लिए , परीक्षा केंद्र सरकारी सीनियर सेकेंडरी विद्यालय में रखा गया. 14 मार्च को अध्यापक छैलसिंह ने पहली बार छेड़छाड़ की जिसका विरोध डर के मारे लड़कियां नहीं कर पाई.

वही 12-14 की लड़कियां वापस जब 16 को अगले पेपर देने गयीं तब तक उसके होंसले बढ़ चुके थे. इस बार ज्यादा हुआ.एक-एक करके किसी के सीने पर हाथ डाला तो किसी के जांघ पर. एक को परीक्षा के बाद बुरी नियत के चलते रोक दिया गया जिसे अन्य शिक्षक ने देखा तो  उसे वहां से रवाना कर दिया  गया । 

डरी सहमी लड़कियों ने आखिर कुछ हिम्मत की और इसकी जानकारी आवासीय विद्यालय की शिक्षिका व घरवालों को दी.

और  पास के पुलिस थाने में शिकायत दर्ज  कराई गयी , शिकायत SC/ST एक्ट और पोस्को एक्ट के अन्तर्गत दर्ज कराई गयी थी ,लेकिन शिकायत के बाद  उल्टा हुआ. और पीड़ित तबसे आतंक के साए में हैं लड़कियां, घरवाले और शिक्षिका.

पहले छेड़छाड़, फिर धमकियाँ. SC/ST व पोस्को एक्ट के तहत मामला दर्ज होने के बावजूद न कार्यवाही हो पाई न ही मीडिया अपना फर्ज निभा रहा. सही समय पर ध्यान देकर फिर एक बेटी की जिंदगी बर्बाद होने से बचायी जा सकती है.

रोज उन्हें धमकाया और डराया जाता है. कभी राह चलते घेरकर तो कभी घर पर पत्थर फेंककर. उनके घर तक पहुँच जाते हैं रोज अपराधी धमकाने.  कभी उन लड़कियों को उठाने की धमकी दी जाती है, तो कभी शिक्षिका का बच्चा गायब करने की धमकी.यहां तक कि  शिक्षिका के घर पर जानलेवा हमला तक कर दिया.

इन लोगों के आतंक और धमकियों से डर के  कुछ गवाहों  ने बयान बदल दिए और  कुछ ने सामाजिक लोकलाज के चलते, अब चुप होकर बैठ गए हैं .

आरोपियों ने अपने रसूख और पहुँच का इस्तेमाल करते हुए जांच को प्रभावित करने के लिए दूसरे जिले (सिरोही) के अपनी जाति के डिप्टी को जाँच के लिए लगवाया.

मुख्य पीड़िता व उसका मजदूर पिता अब तक जुटे हैं, पर न्याय भी बहुत दूर हो.

मामला डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में है. न मीडिया का साथ है न सामाजिक संगठनों तक बात पहुंची है. आरोपी गिरफ्त से बाहर है पर उसका आतंक साफ़ दिखाई दिया जिनसे भी इस बारे में बात की गयी, वह डरे और आतंकित लग रहे हैं । .

इसके अलावा पीड़ितों ने महिला आयोग से भी शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन वहां से भी कोई सहयोग नहीं मिला है । 

 

 

 

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सुरेश जोगेश (IIT ग्रेजुएट, मानवाधिकार कार्यकर्ता व स्वतंत्र पत्रकार)

 

 

 

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