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कोरोना, राहत राशि और दलित मज़दूर महिलाएं- एक रिपोर्ट

suman devathiya

सुमन देवठिया (Suman Devathiya)

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Suman Devathiya

देश में ही नहीं विश्वभर में सभी इस कोरोना की माहमारी से जूझ रहे हैं और सबसे ज्यादा मज़दूर, गरीब, दलित व महिलाओं को आर्थिक व मानसिक पीड़ा झेलनी  पड़ रही है.

इस महामारी के संकट में केन्द्र व राज्य सरकारों ने इन तबको से आते लोगों को नगद राहत राशि देने की घोषणाएं की जिसमें राज्य सरकार ने अलग -अलग विभागों से 1000-1500 रुपये देने की बात की और इस राहत राशि को देने के लिए कुछ शर्तें तय की गईं.

इस आर्थिक राहत राशि के लाभार्थी वही लोग बन सके हैं जिन्होंने श्रमिक पंजीयन करवा रखा हो. बी.पी.एल, स्टेट.बी.पी.एल, अन्तोदय योजना, अन्य श्रमिक, रिक्शा चालक, निराश्रित तथा असहाय जरूरतमन्द परिवार शामिल थे.

राज्य सरकार द्वारा श्रमिक पंजीयन, बी.पी.एल, स्टेट.बी.पी.एल, अन्तोदय योजना से जुड़े लोग जिनके जन आधार डेटाबेस से जुड़े हुये हैं, ऐसे लगभग तीस लाख लोगों को राहत दी गई.

इस राहत राशि के सहयोग में यह भी शर्त रखी गई कि जो व्यक्ति या परिवार श्रमिक पंजीयन करवा रखा हो, बी पी एल, स्टेट बी पी एल, अन्तोदय योजना के लाभार्थी हैं और परिवार के किसी भी सदस्य को सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ मिल रहा है तो उसे इस आर्थिक राहत राशि का लाभ नहीं मिलेगा.

इस कोरोना के संकट में जिन परिवारों को इस राहत राशि का लाभ मिला है उनकी आर्थिक मदद हुई है लेकिन सोचनीय बिंदु यह है कि इसके तहत तय की गई सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना की शर्त की वजह से सभी विधवा, एकल नारी, बुजुर्ग, विकलांग सहित लगभग 80 लाख पेंशनकर्ता लोग इस आर्थिक राहत राशि का लाभ नहीं उठा पाये हैं, और ये संख्या अच्छी खासी है. दुसरे, इस संकट के समय में मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा पेंशन के साथ-साथ बिना मज़दूरी के 1000-1500 रुपए से घर का गुज़ारा नहीं हो पा रहा है.

बहुत बड़ा तबका दलित व गरीब मज़दूर महिलाओं का भी है जो असंगठित क्षेत्र मे काम करती हैं. उनमें से बहुत सारी महिलाएं आज भी इस योजना से नहीं जुड़ी हुई हैं. वजह यह है कि राज्य सरकार व विभाग ने इस योजना का ज्यादा प्रचार-प्रसार नहीं किया जिसके कारण लोग इस महत्वपूर्ण योजना से ना ही जुड़ सके हैं. सो, उनको इस योजना का फ़ायदा भी नहीं हुआ. इस योजना की जागरूकता व पंजीयन नहीं होने की वजह से ज्यादातर मजदूर इस आर्थिक राहत राशि से अपने-आप ही वंचित रह गये है.

राजस्थान में, देखा जाये तो लगभग 30 लाख लोगों ने श्रमिक पंजीयन करवा रखा है, जिसमें महिलाओं का प्रतिशत बहुत कम, लगभग 25-35 प्रतिशत ही है. मनरेगा में जोब कार्ड मज़दूरों की बात करें तो कुल जोब कार्डधारी लोगों में से लगभग 60-70 प्रतिशत लोग ही हैं जिन्होंने मनरेगा मे काम किया है. ऐसे मज़दूर लोगों के भी श्रमिक पंजीयन श्रमिक विभाग में नहीं हुआ है.

कविता (नाम बदला हुआ) जो कि एक विधवा पेंशनधारी महिला है, वे कहती हैं, “मुझे मिलने वाली पेंशन से मेरे बच्चों का लालन-पालन नहीं हो रहा था बल्कि मैं इस पेंशन के अलावा खुली दिहाड़ी मज़दूरी करके अपने परिवार व बच्चों का पालन-पोषण कर रही थी. लेकिन अब इस कोरोना की वजह से मैं यह भी नहीं कर पा रही हूँ. मेरे परिवार मे खाने-पीने के लाले पड़े हुये हैं.”

श्रीमति काजल दलित मज़दूर महिला (नाम बदला हुआ है) ने कहा कि मुझे आज दिन तक नहीं पता चला कि कोई ऐसी जगह है जहाँ श्रमिक पंजीयन करवाना होता है ताकि मैं उस योजना का लाभ ले पाती. इस योजना की जागरूकता के अभाव मे मैंने इस योजना के तहत श्रमिक पंजीयन नहीं करवाने की वजह से आज मुझे आर्थिक राहत राशि का लाभ नहीं मिल पाया है और आर्थिक राहत राशि ना मिलने की बात की सच्चाई का मुझे आज पता चला है.

हम राज्य व केन्द्र सरकार से यह अपील करते हैं कि सरकार द्वारा किये जा रहे काम के अलावा दलित वीमेन फ़ाइट, समर्थ हेल्प लाईन, पी यु सी एल, मानव अधिकार संदर्भ केन्द्र, एम.के.एस.एस जैसे अनेकों संगठन अन्य राज्यों में भी काम करते हैं, जिनके साथ आम जनता, मज़दूर, गरीब, महिलाएं, दलित व वंचित समुदाय जुड़े हुए हैं और ये संगठन आम जनता के मानवाधिकारों को सुरक्षित करने का काम करते हैं, सरकार इन संस्थाओ के साथ अपने नेटवर्क को और मजबूत करके सभी महत्वपूर्ण योजनाओं को जमीनी स्तर व योग्य व्यक्ति तक पहुँचा सकते हैं, जिसका सीधा-सीधा फ़ायदा गरीब, मजदूर, महिलाओं, दलित व वंचित समुदाय को निश्चित तौर पर होगा.

(नोट – इस लेख में लिखा गया व उपयोग में लिया गया डाटा कार्य करने के दौरान मिले अनुभव व अनुमानित डाटा है)

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राजस्थान से आतीं सुमन देवठिया एक ऊर्जस्वी मानवाधिकार कार्यकर्ता है. उन्होंने कई दलित अधिकार के लिए काम करते संगठनों में काम किया है. संप्रति आप दलित वीमेन फाइट समूह से जुड़ी हुई हैं.

One thought on “कोरोना, राहत राशि और दलित मज़दूर महिलाएं- एक रिपोर्ट”

  1. इसके चलते यातायात साधना के आवागमन शुरू होने के कारण लोग एक जगह से दूसरे स्थान पर नहीं जा सकते थे इसके चलते शासन की दुकान में जो कि लोगों की पहुंच से दूर थी वहां पर कोई साधन नहीं जाने के कारण वह अपने राशन से वंचित रहे उन्हें उनकी तक राशन को पहुंचाने की कोई मदद नहीं दी गई यहां तक की जिन लोगों के पास राशन कार्ड ,मजदूर डायरी नहीं थी उन्हें राशन की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई

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