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एक रिपोर्ट 

ऋषिकेश देवेंद्र खाकसे (Hrishikesh Devendra Khakse)

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विख्यात कवि, चित्रकार तथा शिल्पकार डॉ. सुनील अभिमान अवचार इनके ‘आउटकास्टेड एक्सप्रेशन’ नामक चित्रप्रदर्शनी मुम्बई स्थित ‘टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान’ में सम्पन्न ‘महिलाओं के सवेतन और अवैतनिक कार्य की बदलती रूपरेखा’ इस विषयपर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के मौके पर दिनांक 12 एवं 13 जुलाई 2018 को सम्पन्न हुई. 

अपनी वैचारिक आयु के शुरुवाती दौर से ही डॉ. सुनील अवचार की रुचि कविता के साथ साथ चित्रकारिता एवं शिल्पकारिता में भी रही है.

 डॉ. सुनील अभिमान अवचार का हाल ही में प्रकाशित लोकप्रिय मराठी काव्यसंग्रह ‘केंद्र हरवत चाललेल्या वर्तुळाचा परीघ’ की क़ामयाबी समूचे साहित्यविश्व में चर्चा का विषय रहा है.

 उनकी कविता की तरह ही चित्र तथा शिल्पों के केन्द्रीभूत विषय भी आम आदमी, आधुनिकीकरण एवं भूमंडलीकरण की आड़ में उसके मौलिक अधिकारों का हनन कर रही नीतियों का विरोध, शोषण की तमाम प्रणाली से मुक्ति हेतु स्त्री-दलित-आदिवासी-किसान-संघठित एवं असंगठित क्षेत्र में कार्यरत मजदूरों के पक्ष में खड़े है.

प्रदर्शनी के मौके पर डॉ. सुनील अवचार के साथ की गई बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि, “हमाराहमारे स्त्रियॉं का जीवन कभी चित्रों का विषय बना ही नहीं. कभी मोनालिसा’ की हँसी के रहस्य की खोज में तो कभी न्यूड चित्रों’ की चर्चा करने में सारस्वतों ने अपनी बुद्धि का बल लगा दिया.

किन्तु एक आदमी का मैला जो दूसरा आदमी सदियों हाथों से ढोता रहा हैवह कौन हैउसकी पीड़ा क्या हैयह जानना किसी ने भी जरूरी नहीं समझा.

महान चित्रकार राजा रवि वर्मा को काल्पनिक देवी देवताओं के स्केच बनाना मुनासिब लगा. 

सरस्वतीलक्ष्मी के स्केच बनाना मुनासिब लगा.

लेकिन वास्तविकता में जिस लक्ष्मी ने स्वच्छता कीमैला ढो-ढो कर जिस सरस्वती के हथेली की रेखाएं मिट गईवह महिलाएं क्यों नहीं दिखी महान चित्रकारों कों?

हुसैन को गजगामिनी दिखीलेकिन मेहनत मज़दूरी करने वाली महिलाएं नहीं नज़र आईं. यह सवाल मुझे सताता है!

आज हम यह बदल रहें है.

हमारे चित्रों की नायिका’ मोनालिसा नहींबल्कि शोषणवादी व्यवस्था के आख़िरी पायदान पर खड़ीन्याय की गुहार लगाने वालीमैला साफ़ करने वाली हमारी माँ बहन है.

Sunil Awachar and invitation

 

Sunil Awachar Painting Exhibition

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ऋषिकेश देवेंद्र खाकसे भारतीय खाद्य निगम में कार्यरत हैं. वह एक लेखक एवं स्वतंत्र शोधार्थी हैं. उनसे hrishikhakse@gmail.com, 9860237253 पर संपर्क किया जा सकता है.

 

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