सावित्री बाई फुले को उनके 191वें जन्मदिन पर याद करते हुए

डॉ सूर्या बाली “सूरज धुर्वे” (Dr. Suraj Bali ‘Suraj Dhurvey’) शिक्षा के महत्त्व को सावित्री बाई फुले ने जितनी व्यापकता से समझा उसकी मिसाल उनके पूरे जीवन में उनके द्वारा किये बाकमाल कार्यों से मिलती है. शिक्षा के ऐसे महत्त्व में उनके अपने निजी जीवन शिक्षा के चलते आये ज़बरदस्त परिवर्तन की छाप भी है. ये बात अब उनके समझ […]

‘जोजो रैबिट’: अंधभक्तों को आईना | फिल्म समीक्षा | बहुजन दृष्टिकोण

लेनिन मौदूदी (Lenin Maududi) सबसे पहले मैं आपको अपना एक किस्सा सुनाता हूँ। बात बहुत पुरानी नहीं है, हुआ यूँ कि मुझे सरकारी स्कूल में पहली बार बच्चों को सामाजिक विज्ञान पढ़ाने का मौक़ा मिला था। शायद वह 8th-D की क्लास थी, विषय था ‘हाशिये का समाज’। ब्लैक बोर्ड पर मैंने चॉक से एक शब्द लिखा ‘मुसलमान’ और बच्चों से […]

बहुजन ऑटोनोमी – एक विचार

युवा साथियों के नाम जिनसे बहुजन दृष्टिकोण पर बातचीत हुई   गुरिंदर आज़ाद (Gurinder Azad) बहुजन गाड़ी पर 85% लोगों का बोझा है. बहुत जद्दोजेहद के बावजूद यह बहुत धीमे चल रही है. यह बोझा ज़िम्मेदारी में जब बदलेगा तब गाड़ी थोड़ी खुशगवार रफ़्तार पकड़ेगी. ज़िम्मेदारी का मतलब बहुजनों को ईंधन और पुर्जों में खुद को ढालना पड़ेगा. बहुजन ऑटोनोमी इसकी […]