मानसिक स्वास्थ्य का दाग़ और एक ब्राह्मण परिवार का अनुभव

September 7, 2025 administrator 0

मेरे पिता की बीमारी ने एक ब्राह्मण परिवार में अर्ध-बहिष्कृत होने का अर्थ परिभाषित कर दिया। इस नवउदारवादी युग में, एक ब्राह्मण परिवार में, प्रतिष्ठा और सम्मान व्यक्ति के व्यवसाय से जुड़े होते थे, और सम्मान जातिगत स्थिति से। मेरे पिता अपनी मानसिक बीमारी का पता चलने से पहले एक सरकारी कर्मचारी थे। मनोरोग दवाओं की भारी खुराक के कारण उनका काम और पदोन्नति पर बुरा असर पड़ा। किसी व्यक्ति की कामकाजी हेसियत उसके अपने कर्तव्य निभाने और परिवार की देखभाल करने के व्यक्तिगत गुणों से जुड़ी होती है। उसमें वे असफल रहे क्योंकि कार्यालय की संरचना एक स्वस्थ शरीर वाले व्यक्ति पर आधारित थी, जिसे कोई मानसिक स्वास्थ्य समस्या न हो। सिज़ोफ्रेनिया उनकी पहचान से गहराई से जुड़ गया। एक विशेषता जिसने उन्हें सुरक्षित रखा, वह थी ब्राह्मण पुरुष होने की उनकी जातिगत स्थिति।

Surya Bali

भारतीय इतिहास के अलौलिक महामानव महात्मा ज्योतिबा फुले

August 9, 2021 administrator 0

डॉ सूर्या बाली ‘सूरज धुर्वे’ (Dr. Surya Bali ‘Suraj Dhurve) ज्योतिराव गोविंदराव फुले एक महान विचारक, समाजसेवी, लेखक, दार्शनिक तथा क्रान्तिकारी व्यक्ति थे. आपको ‘महात्मा […]

पितृसत्ता, नारीवाद और बहुजन महिलाएं

June 13, 2020 administrator 0

जूपाका सुभद्रा (Joopaka Subadra)   जूपाका सुभद्रा से बातचीत का यह (पहला) भाग भारत नास्तिका समाजम और साइंटिफिक स्टूडेंट्स फेडरेशन द्वारा आयोजित एक बातचीत में उन्होंने रखा […]

हिंदी, ब्राह्मण के हाथ में औज़ार और पंजाब- एक बहुजन नज़रिया

October 13, 2017 administrator 0

गुरिंदर आज़ाद (Gurinder Azad) खबर पंजाब से है और अच्छी है. बठिंडा-फरीदकोट हाईवे पर हिंदी और अंग्रेजी में लिखे राह-ईशारा तख्तियों पर रंग पोत दिया […]