टीना डाबी के दफ्तर-प्रवेश का ब्राह्मणी कर्मकांड बनाम वैज्ञानिक चेतना की कसौटी

अरविंद शेष (Arvind Shesh) बेशक इसरो के चीफ वैज्ञानिक माधवन नायर या वैज्ञानिक राधाकृष्णन या वैज्ञानिक के. शिवन के मुकाबले आइएएस टीना डाबी की जिम्मेदारी ज्यादा है अंधविश्वासों के खिलाफ वैज्ञानिक चेतना को निबाहने की, उसे मजबूत करने की! इसरो के वैज्ञानिक माधवन नायर या राधाकृष्णन अगर किसी भी अंतरिक्ष यान के प्रक्षेपण के पहले बालाजी तिरुपति या किसी मंदिर […]

यहाँ एक तस्वीर है

[smartslider3 slider=2] अनु रामदास (Anu Ramdas) कुछ समय पहले की बात है जब मैं एक शूद्र संत-कवि सरलादास द्वारा लिखित उड़िया महाभारत के अनुवाद की तलाश कर रही थी. द शेयर्ड मिरर  पर सरला की गंगा पर केंद्रित एक अंश को पोस्ट करने के लिए उत्सुक थी. इसलिए मैं पुस्तकालय और इंटरनेट पर इन पर हुई खोजों को इकठ्ठा करने […]

एंटी-कास्ट पॉलिटिक्स को समझने में उदारवादियों के भीतर दर्शन की कंगाली

ओमप्रकाश महतो (Omprakash Mahato) ऐसे सामाजिक वैज्ञानिक भी हैं जो केवल कागज़ों-किताबों के माध्यम से या सम्मेलनों और सेमिनारों में भाग लेकर या समाज का दूर से अवलोकन आदि करके ही जाति पर अपने विचार विकसित करते हैं. जबकि पाठ्यपुस्तकों को पढ़ना एक पारंपरिक तरीका है, कुछ विद्वान बॉलीवुड फिल्में देखने, समाचार पत्र पढ़ने, न्यूज़-रूम स्टूडियो में बहस देखकर, अपने […]

प्रतिनिधित्व की आवश्यकता: भारत में एक आदिवासी महिला कुलपति

स्वप्निल धनराज (Swapnil Dhanraj) आखिरी बार कब भारतीय अकादमिया में एक जनजातीय समुदाय से आने वाली महिला की सफलता की कहानी का जश्न मनाया गया? यदि हम इस बारे में सोचते हैं कि भारतीय शिक्षा प्रणाली ने दलितों, आदिवासियों और अन्य हाशिए के समुदायों के मुद्दों से कैसे निपटा है, तो ऐसा प्रतीत होता है कि उन मुद्दों को खराब […]

कोरोना, राहत राशि और दलित मज़दूर महिलाएं- एक रिपोर्ट

suman devathiya

सुमन देवठिया (Suman Devathiya) देश में ही नहीं विश्वभर में सभी इस कोरोना की माहमारी से जूझ रहे हैं और सबसे ज्यादा मज़दूर, गरीब, दलित व महिलाओं को आर्थिक व मानसिक पीड़ा झेलनी  पड़ रही है. इस महामारी के संकट में केन्द्र व राज्य सरकारों ने इन तबको से आते लोगों को नगद राहत राशि देने की घोषणाएं की जिसमें […]

‘ना तो मैं तुम्हारा आंकड़ा हूँ, ना ही कोई वोट बैंक हूँ’: सामाजिक कार्यकर्ता और समाजशास्त्री अभय खाखा की याद में

View Post चित्रांगदा चौधुरी (Chitrangada Choudhury), अनिकेत आगा (Aniket Aga) बात 18 मार्च 2015 की है. झारखंड के लातेहर जिले के बरवाडीह प्रखंड-कार्यालय के नजदीक लगभग 60 आदिवासी पुरुषों ने 2013 के ‘भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार, पुनर्वास, पुनर्स्थापन अधिनियम’ में संशोधन के उद्देश्य से लाये गये मोदी सरकार के विधेयक की प्रतियों पर खुले में […]

गढ़ा मंडला की महारानी दुर्गावती का बलिदान और ब्राह्मणवादी षणयंत्र

Surya Bali

डॉ. सूर्या बाली “सूरज धुर्वे” रानी दुर्गावती ने भारतीय, खासकर गोंडवाना के लोगों के दिलों में बहुत सम्मानपूर्ण स्थान प्राप्त किया है. आज भी लोग उनकी वीरता और बलिदान की कहानियाँ सुनाते हुए रोमांचित हो उठते हैं और ऐसी अद्वितीय वीरांगना के वंशज होने पर गर्व करते हैं. आज भी उनके लिए करोड़ों कोइतूरों के दिलों में अपार श्रद्धा है […]

आप इसे भी पितृसत्ता कैसे कह सकते हैं…?

जूपाका सुभद्रा (Joopaka Subadra) जूपाका सुभद्रा की बातचीत का यह दूसरा भाग है जो उन्होंने भारत नास्तिका समाजम और साइंटिफिक स्टूडेंट्स फेडरेशन द्वारा आयोजित एक बातचीत में रखा था. — सवर्ण महिलाओं का कहना है कि वे अपने घरों में अपने बच्चों की गंदगी साफ करती हैं. फिर इन महिलाओं के बारे में क्या जो अपने घरों के बाहर सभी […]

ऑनलाईन शिक्षण-प्रणालीः वर्तमान चुनौतियाँ और ग्रामीण एवं दलित छात्रों का हाशियाकरण

दीपक कुमार (Deepak Kumar), ज्योति दिवाकर (Jyoti Diwakar) वर्तमान में भारत समेत, विश्व के 195 देश कोविड– 19 (कोरोना वायरस) से प्रभावित है. इस महामारी में लोग सामाजिक, राजनीतिक तथा आर्थिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं. इसके साथ ही भारत की शिक्षा-व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है. इस महामारी वजह से सरकार नई शिक्षा नीति– 2019 के तहत ऑनलाईन […]

पितृसत्ता, नारीवाद और बहुजन महिलाएं

जूपाका सुभद्रा (Joopaka Subadra)   जूपाका सुभद्रा से बातचीत का यह (पहला) भाग भारत नास्तिका समाजम और साइंटिफिक स्टूडेंट्स फेडरेशन द्वारा आयोजित एक बातचीत में उन्होंने रखा था.   आज मैं जिस विषय पर बात करने जा रही हूँ, वह है ‘पितृसत्ता, नारीवाद और बहुजन महिलाएँ’! नारीवादियों के अनुसार, नारीवाद, महिलाओं और पुरुषों के बीच, समानता को लेकर है, और, समानता के लिए है. वे कहती हैं, सभी महिलाएं […]