दुश्वार राहों से गुज़रता पसमांदा आंदोलन और उसकी मांगें

Faiyaz Ahmad Fyzie New

जज़्बाती सवालों से हटकर… शिक्षा, रोज़ी-रोटी और सत्ता में हिस्सेदारी की बात फ़ैयाज़ अहमद फ़ैज़ी (Faiyaz Ahmad Fyzie) पसमांदा फारसी का शब्द है जो आगे चलकर उर्दू भाषा का हिस्सा बना. इसका अर्थ है- जो पीछे रह गया है. पसमांदा शब्द मुस्लिम धर्मावलंबी आदिवासी, दलित और पिछड़े के लिए बोला जाता है. पसमांदा अन्दोलन का […]

उर्दू अदब का जातिवादी चरित्र

Faiyaz Ahmad Fyzie New

फ़ैयाज़ अहमद फ़ैज़ी (Faiyaz Ahmad Fyzie) उर्दू मुख्यतः अशराफ की भाषा रही है। जिसे वो अपने राजनीतिक स्वार्थ सिद्धि के लिए पूरे मुसलमानों की भाषा बना कर प्रस्तुत करता है, जबकि पसमांदा की भाषा क्षेत्र विशेष की अपभ्रंश भाषाएं एवं बोलियाँ रही हैं। अशराफ अपनी इस नीति में कामयाब भी रहा है और आज भी […]

आतंकवाद का मूल: वहाबीवाद या सैयदवाद/इबलीसवाद?【1】

Nurun N Zia Momin Edited

  एड0 नुरुलऐन ज़िया मोमिन (Adv. Nurulain Zia Momin) आतंक का मकसद और अर्थ घबराहट, डर, भय पैदा करना होता है. यदि आतंकवाद को सीधे-सीधे परिभाषित किया जाये तो हर वह व्यक्ति, संगठन निःसन्देह आतंकवादी है जिसके कृत्यों से लोगो में भय, घबराहट अथवा डर पैदा हो. एक तरफ जहाँ हमारे देश में ही कई […]

उर्दू अदब में जातिवाद

faqir

जय प्रकाश फ़ाकिर (Jay Prakash Faqir) मै DEMOcracy का एक बार फिर से शुक्रगुजार हूँ कि उन्होंने मुझे मौका दिया इस विषय पे बोलने के लिए. मै अपनी बात इकबाल के इस शेर से ही शुरू करना चाहता हूँ- यूँ तो सय्यद भी हो मिर्ज़ा भी हो अफ़्ग़ान भी हो तुम सभी कुछ हो बताओ मुसलमान […]

पसमांदा मुस्लिमों के खिलाफ ज़हर उगलते थे सर सैयद

Faiyaz Ahmad Fyzie

  फ़ैयाज़ अहमद फ़ैज़ी (Faiyaz Ahmad Fyzie) इलाहबाद से निकलती मासिक पत्रिका ‘समकालीन जनमत’ के नवंबर 2017 अंक में छपा लेख “सर सैयद और धर्म निरपेक्षता” पढ़ा. पढ़ कर बहुत हैरानी हुई कि पत्रिका में सर सैयद जैसे सामंतवादी व्यक्ति का महिमा मंडन एक राष्ट्रवादी, देशभक्त, लोकतंत्र की आवाज़, हिन्दू मुस्लिम एकता का प्रतीक, इंसानियत […]

ज़कात और तथाकथित सैयद

Nurun N Zia Momin

  एड0 नुरुलऐन ज़िया मोमिन (Adv. Nurulain Zia Momin) निःसन्देह इस्लाम में इबलीसवाद【1】के लिए कोई स्थान नहीं है किन्तु ये भी सत्य है कि कुछ लोगों द्वारा मुसलमानों में इबलीसवाद घुसड़ने व उसे इस्लाम का सिद्धांत सिद्ध करने का सदैव से प्रयास किया जाता रहा है जिसके लिए उनके द्वारा इस्लामी सिद्धान्तों को तोड़-मरोड़ कर […]

कहानी एक मुसल्ली की: अगरा सहुतरा

Faiyaz Ahmad Fyzie

  फ़ैयाज़ अहमद फैज़ी (Faiyaz Ahmad Fyzie)  पंजाब के इलाके में बसने वाले पसमांदा स्वच्छकार, जो पंजाबी समाज में सबसे निचले स्तर के माने जाते हैं मुसल्ली कहलाते हैं. मुसल्ली अरबी भाषा का शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ सला (ईश्वर की उपासना का एक विशेष इस्लामी विधि जिसे नमाज़ भी कहतें है) स्थापित करने वाला […]

हाशिए के समाज और पहचान का संकट

faqir

जय प्रकाश फ़ाकिर (Jay Prakash Faqir) [प्रस्तुत आलेख जय प्रकाश फ़ाकिर द्वारा उपरोक्त विषय पर दिए गए व्याख्यान का हिस्सा है, जो उन्होंने DEMOcracy द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में दिया था. इस व्याख्यान का विडियो लिंक आखिर में दिया गया है] मैं #DEMOcracy का शुक्रगुज़ार हूँ जिसने मुझे इस विषय पर बोलने का मौक़ा दिया. किसी भी […]

रद्द-ए-सर सैयद – सर सैयद का निरस्तीकरण

Faiyaz Ahmad Fyzie

  फ़ैयाज़ अहमद फैज़ी (Faiyaz Ahmad Fyzie)  जब पसमांदा आंदोलन ने सर सैयद अहमद खाँ के राष्ट्रविरोधी, इस्लाम-विरोधी, महिला शिक्षा विरोधी, पसमांदा विरोधी और जातिवादी विचारों (राउंड टेबल इंडिया, और ‘पसमांदा पहल’ पत्रिका में छपे मसूद आलम फलाही, नुरुल ऐन ज़िया मोमिन का लेख और मेरे फेस बुक के 17 से 24 अक्तूबर के पोस्ट […]

सैयदवाद ही इबलीसवाद है?

Nurun N Zia Momin

  एड0 नुरुलऐन ज़िया मोमिन (Adv. Nurulain Zia Momin) इस लेख को लिखने की आवश्यकता इसलिए महसूस हुई क्योंकि पसमांदा आन्दोलन से सम्बन्धित व्यक्तियों, पसमांदा संगठनो के पदाधिकारियों तथा समर्थकों द्वारा इबलीसवाद, इबलीसवादी तथा इबलीसी जैसे शब्दों का प्रयोग अक्सर अपने लेखों, भाषणों, फेसबुक, व्हाट्सअप जैसी सोशल साइटों पर अपनी पोस्टों तथा बहस के दौरान अपनी […]