‘फुले’ फिल्म की आंबेडकरी दृष्टिकोन से समीक्षा

May 28, 2025 administrator 0

महात्मा ज्योतिराव फुले आधुनिक युग में शोषित बहुजन समाज के सशक्तिकरण के पहले क्रांतिकारी विचारक थे। उन्होंने ब्राह्मणवादी सत्ता संरचना के आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक-सांस्कृतिक वर्चस्व को सीधे चुनौती दी। ‘गुलामगिरी’, ‘शेतकऱ्याचा आसूड’ जैसी उनकी किताबों ने शोषण की व्यवस्था की जड़ें उजागर कीं। “सत्यशोधक समाज”  की स्थापना कर उन्होंने एकेश्वरवादी सार्वजनिक सत्यधर्म की नींव रखी, जिसने हिंदू ब्राह्मणी धर्म की सत्तासंरचना को जोरदार झटका दिया। छत्रपती शिवाजी महाराज की समाधि की खोज और “शिवाजी जयंती मनाने की शुरुआत”  जैसे कार्यों से उन्होंने बहुजन समाज को ऐतिहासिक प्रेरणा देने का प्रयास किया। सावित्रीबाई फुले के साथ उन्होंने स्त्री शिक्षा और दलित-बहुजन उत्थान के लिए अथक संघर्ष किया। लेकिन ‘फुले’ फिल्म इस क्रांतिकारी विरासत को धुंधला करती है और फुले की एक अलग ही छवि प्रगट करती है।