दलितों के खिलाफ़ गाय एक राजनीतिक हथियार के रूप में
गुरिंदर आज़ाद समसामयिक मुद्दों पर साक्षात्कार और डॉक्यूमेंट्रीज की आंबेडकर युग श्रृंखला में, गुरिंदर आज़ाद राउंड टेबल इंडिया के लिए अरविंद शेष और रजनीश कुमार […]
गुरिंदर आज़ाद समसामयिक मुद्दों पर साक्षात्कार और डॉक्यूमेंट्रीज की आंबेडकर युग श्रृंखला में, गुरिंदर आज़ाद राउंड टेबल इंडिया के लिए अरविंद शेष और रजनीश कुमार […]
अरविंद शेष फिल्म में ‘कबाली’ का डायलॉग है- “हमारे पूर्वज सदियों से गुलामी करते आए हैं, लेकिन मैं हुकूमत करने के लिए पैदा […]
(कृष्ण की लोक लुभावन छवि का पुनर्पाठ!) मानुषी आखिर ये मिथकीय कहानियां किस तरह की परवरिश और शिक्षा देती हैं, जहां पुरुषों को सारे अधिकार […]
डॉ मुसाफ़िर बैठा ओबीसी साहित्य और बहुजन साहित्य की धारणा को हिंदी साहित्य के धरातल पर जमाने का प्रयास बिहार के कुछ लोग और उनका […]
संजय जोठे धर्म जो काम शास्त्र लिखकर करता है वही काम राष्ट्र अब फ़िल्में और विडिओ गेम्स बनाकर बनाकर करते हैं. इसी के साथ सुविधाभोगी […]
ललित कुमार एक तरफ तो प्रधान मंत्री और देश की सरकारें खुदरा भारतीय बाजार में १०० प्रतिशत तक पूंजी निवेश का समर्थन करते है, विदेशी […]
दिनेश अमिनमन्तु [यह भाषण “मीडिया में दलित प्रोफेशनल की सहभागिता”, दिनेश अमिनमन्तु द्वारा कन्नड़ में दिया गया था। जो कर्नाटक SC/ST एडिटर एसोसिएशन द्वारा बाबासाहेब […]
जयप्रकाश फाकिर अम्बेडकर , पेरियार, ललई यादव, कयूम अंसारी जैसे दलित बहुजन नेता इसी सवर्णवादी समझ से जूझते हुए दलित बहुजन प्रश्न को सियासी दायरे […]
अरविंद शेष दो बयान देखें:- 1- तब के रावण, आज के नसीमुद्दीन/ तब के लक्ष्मण आज के दयाशंकर सिंह. तब की शूर्पनखा, आज की […]
सुरेश जोगेश 4 नन्ही सी पीड़ित बेटियां, 1 बेबस लेकिन प्रयासरत शिक्षिका, सहमे अभिभाभावक, अफसरों की आज्ञा तले दबी स्थानीय पुलिस और 5 महीने से […]
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