नवयान दर्शन : बुद्ध की शिक्षाओं का आधुनिक विवेचन (पुस्तक समीक्षा)
भिक्खुनी विजया मैत्रीय (Bhikkhuni Vijaya Maitriya) किताब का शीर्षक: नवयान दर्शन : बुद्ध की शिक्षाओं का आधुनिक विवेचन लेखक: डॉ. रत्नेश कातुलकर पृष्ठ संख्या: 264 […]
भिक्खुनी विजया मैत्रीय (Bhikkhuni Vijaya Maitriya) किताब का शीर्षक: नवयान दर्शन : बुद्ध की शिक्षाओं का आधुनिक विवेचन लेखक: डॉ. रत्नेश कातुलकर पृष्ठ संख्या: 264 […]
आशुतोष सिंह बोद्ध (विद्रोही)/ Ashutosh Singh Boddh (Vidrohi) हर साल, छात्र संघ चुनावों के आते ही, दिल्ली विश्वविद्यालय एक भव्य तमाशे में बदल जाता है। […]
मेरे पिता की बीमारी ने एक ब्राह्मण परिवार में अर्ध-बहिष्कृत होने का अर्थ परिभाषित कर दिया। इस नवउदारवादी युग में, एक ब्राह्मण परिवार में, प्रतिष्ठा और सम्मान व्यक्ति के व्यवसाय से जुड़े होते थे, और सम्मान जातिगत स्थिति से। मेरे पिता अपनी मानसिक बीमारी का पता चलने से पहले एक सरकारी कर्मचारी थे। मनोरोग दवाओं की भारी खुराक के कारण उनका काम और पदोन्नति पर बुरा असर पड़ा। किसी व्यक्ति की कामकाजी हेसियत उसके अपने कर्तव्य निभाने और परिवार की देखभाल करने के व्यक्तिगत गुणों से जुड़ी होती है। उसमें वे असफल रहे क्योंकि कार्यालय की संरचना एक स्वस्थ शरीर वाले व्यक्ति पर आधारित थी, जिसे कोई मानसिक स्वास्थ्य समस्या न हो। सिज़ोफ्रेनिया उनकी पहचान से गहराई से जुड़ गया। एक विशेषता जिसने उन्हें सुरक्षित रखा, वह थी ब्राह्मण पुरुष होने की उनकी जातिगत स्थिति।
Copyright © 2026 | WordPress Theme by MH Themes